ज्योति मौर्य,आलोकमौर्य और मनीष दूबे की इस त्रिकोणीय प्यार और धोखे केस में कौन सही ,कौन ग़लत
ज्योति मौर्य और आलोक मौर्य की फ़िल्मी कहानी जिसकी सच्चाई की सभी पर्तों को सोशल मीडिया पर एक एक करके खोला जा रहा है , उससे आप लोगो में शायद ही कोई अनजान होगा। पर हम यहाँ पर पूरे मामले से इतर केवल उन बातो पर चर्चा करेंगे,जो शायद इस पूरे मामले का रूख अलगही दिशा में मोड़ सकती थी ।
आलोक मौर्य की शादी ज्योति मौर्य से होने के बाद , उन्होंने अपनी पत्नी की महत्वकांक्षाओं को पंख देने के लिए सभी आवश्यक मूलभूत आवश्यकताओं पर ध्यान देते हुए ,उसे उपलब्ध करने के लिए भरपूर प्रयास किया।वो सफल भी हुईं।ईश्वर ने उन्हें एक साथ दो बेटियों के रूप में पुत्री धन भी प्रदान की।2015 में एसडीएम के रूप में चयनित होने के बाद लगभग ४ वर्ष तक सब ठीक चला , फिर ऐसा क्या हुआ की उनकी पत्नी इतनी प्रखर रूप से मनीष दुबे के साथ अपने संबंध को लेकर आलोक मौर्य के सामने आ गई।
शायद वो इस शादी से कभी खुश ही ना रही हो , उनकी ऑफिसर बनने की महत्वाकांक्षा केवल अपने एक सपने को पूरा करने की ना रही हो! अपने जीवन को बेहतर बनाने की उनकी इच्छा केवल एक ही आयाम पर ही ना सीमित रही हो! तो ?
ख़ैर इन बातो पर बिना प्रमाण बहस करना व्यर्थ होगा।परंतु एक बात तो तय है की सब कुछ अचानक नहीं हुआ।एक क्लास १ ऑफिसर और दूसरा क्लास ४ का कर्मचारी जहां शादी जैसे बंधन में जीवन यापन करते है तो उनके बीच सब सही रहते हुए भी कुछ मिसअंडरस्टैंडिंग अपनी जगह हमेशा बना ही लेती है।ऐसा इनके भी साथ हुआ , जिसे साधारणतः हम इन्फ़ेरियरिटी काम्प्लेक्स के नाम से आज के इस दौर में परिचित होंगे ।और इसी दौरान वही पत्नी जो पति की सारी बातो को बिना प्रश्न किए मानती रही हो , अचानक अपनी वैचारिक स्वातंत्र्य प्रकट करने लगे तो सीधे तौर पर पुरुष की पौरुषता को ये बात हज़म नहीं होती।
अब यहाँ पर मैं एक बात स्पष्ट करना चाहता हूँ कि ज्योति ने जो किया वो सामाजिक एवं भावनात्मक रूप से सरासर ग़लत है , इसमें जरा भी संदेह नहीं ! ज्योति मौर्य का खुल के अपने प्रेम प्रसंग का खुलासा अपने पति से करना उनकी घमंड एवं अंदर ही अंदर दबी हुई उनकी इस संबंध से जुड़ी प्रतीकर्षण को साफ़ साफ़ प्रतिलक्षित करता है।शायद उनको लगा की अब एसडीएम बनने के बाद वो रिश्तों की नाज़ुक डोर को यूँ तोड़ सकती है जैसे कि ये उनके जीवन का नयी शुरुआत हुआ हो।पर ज्योति मौर्य को एक बात का अंदाज़ा नहीं था की इस समाज में आप कितने टोपची हो जाओ चरित्र पर उठा कीचड़ कोई भी पद या प्रतिष्ठा धो नहीं सकती ।
परंतु आलोक मौर्य के द्वारा सोशल मीडिया पर आकर इस संपूर्ण प्रकरण को पब्लिक करना इस परिस्थिति का कोई हल नहीं था । इसके और भी हल निकल सकते थे।
१. पत्नी की बाक़ी इच्छाओ को जैसे पूरा किया वैसे ही बिना कुछ सवाल उठाये ये आख़िरी इच्छा भी पूरी कर देनी चाहिए थी । इतिहास गवाह है की ज्योति मौर्य और मनीष दुबे जैसे संबंध का अंत कभी भी सुखांत नहीं होता ।
इंसान कोई भी हो उसकी साइकोलॉजी रिवर्स में ऑपरेट करती है ।ख़ैर ये सभी पर लागू नहीं होता ।पर इस केस में ये पूरी तरह सही होता। यदि आलोक मौर्य ऐसा करते तो , ज्योति मौर्य की नज़रों में और समाज कि नज़रों में आलोक मौर्य का क़द बड़ा हो जाता और एक वक़्त के बाद आलोक मौर्य को उनकी वाइफ के वापस आने की एक सकारात्मक उम्मीद रहती ।परंतु तात्कालिक परिस्थिति को देखते हुए स्थिति बिलकुल उलट ही नज़र आ रही है ,इतना बड़ा कदम उठाने के बावजूद भी ज्योति मौर्य को अपने किए पर पछतावा तो दूर ,उल्टे वो ख़ुद के डिफेंस में लगी हुई है पूरी ज़ोर शोर के साथ।ऐसा इसलिए कि आलोक मौर्य ने जो किया उससे मिस मौर्य के अंदर पछतावा नहीं बल्कि नफ़रत कि ज्वाला और बढ़ सी गई है ।अलग थलग पड़ जाने के बाद ज्योति का समस्त एडवेंचर कभी कभी ख़त्म होता और वो वापस उसी रिश्ते कि तलाश में आती जहां उन्हें कोई सच में प्यार करता ।उनकी इज़्ज़त करता।क्योंकि हमारा समाज कितना भी एडवांस क्यों ना हो जाये ,पर कोई भी ऐसे स्त्री के साथ घर नहीं बसाता जिसके ऊपर ख़ुद के पति को ही धोखा देने का आरोप हो , चाहे परिस्थिति कुछ भी रही हो ।एक ना एक दिन ज्योति को भी अपने चारो तरफ़ मतलब परस्त लोगो का ही जमावड़ा दिखता , जो उसे बेचैन करता और वो अपनी बेटियों और पति के बारे में , उनके अनकेंडिशनललव के बारे में वापस सोचती ।
मिस्टर आलोक मौर्या चाहे तो अभी भी इसे अलग मोड़ दे सकते है ।क्योंकि सबको पता है की रिश्ते की डोर कभी ज़बरदश्ती या अन्य किसी रास्ते को अख़्तियार करने से जुड़ती नहीं बल्कि दिन प्रतिदिन कमजोर होती जाती है । उन्हें ज्योति मौर्य को ऐसे आज़ाद कर देना चाहिए कि जैसे उनका उस स्त्री के साथ कोई संबंध ही ना रहा हो ।और अपने जीवन में बेटियों को लेकर आगे बढ़ जाना चाहिए । भविष्य में ज्योति मौर्य को उनके नियति पर छोड़ देना चाहिये ।
क्योंकि पुरानी कहावत है कि कर्म करने पर अपना अधिकार है ,पर फल अपने हिसाब से आये इस पर अपना कोई बस नहीं।ऐसा करके वो समाज और अपने बेटियों की नज़र में सच्चे हीरो बन जाएँगे, रही बात धोखे और अहंकार की ,तो इसका परिणाम बड़े बड़े को निगल गया तो ज्योति या मनीष दूबे क्या है ।
प्रणाम ,,,

Right
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