Chandrayan 2- Second step toward a glorious history. चंद्र यान - 2

परिचय 

दोस्तो, जैसा कि हम पहले भी चर्चा कर चुके हैं की चंद्रयान  1 ने कैसे isro के ख्वाबों के साथ साथ देश के सपनो को आकाश की गहराइयों में जाकर उजागर किया। इसके चर्चे उस वक्त दुनिया भर के लोगो के  जुबान पर थी। उसी उड़ान को और ऊंचाई और कामयाबी दिलाने के उद्देश्य से भारत के इस अनूठे organisation ने लगभग 10 सालो बाद आपका दूसरा चंद्र यान मिशन को लॉन्च करने की योजना बनाई।22 जुलाई 2019 को इसरो द्वारा इसे लॉन्च किया गया। चंद्रयान 1 ने जो जानकारियां चंद्रमा को लेकर इकट्ठा की थी, उन्ही इन्फॉर्मेशन को और गहराई से पता करने के लिए इस मिशन की योजना तैयार की गई।इसीलिए इसके कंपोनेंट में एक लैंडर और रोवर दोनो को जोड़ा गया है जो moon की सतह पर जाकर इन्फॉर्मेशन इकट्ठा करने में और कारगर साबित हो सकती।

आपने चंद्र यान 1 के बारे में पढ़ते वक्त ये जान लिया की उस मिशन में इसरो ने केवल एक आर्बिटर को स्पेसक्राफ्ट की मदद से moon के कक्षा में स्थापित किया था।जिसने तमाम प्रकार के उपकरणों के माध्यम से या पता किया की moon का सर्फेस कैसा है,वायुमंडलीय संरचना कैसी है और सबसे महत्वपूर्ण खोज,  उधार ice के फॉर्म में पानी है। हालांकि आज भी अपना चंद्रयान 1 moon के चक्कर लगा रहा है। बस फर्क इतना है की हमारा संपर्क उससे टूट गया है।

दोस्तो यहां एक बात ध्यान देने की है है आखिर इस लॉन्चिंग को अंजाम देने में इतना लंबा समय kyu लगा।

1- चंद्रयान 1 में जहां केवल एक आर्बिटर को Moon का चक्कर लगाने के लिए डिजाइन करके प्रोजेक्ट किया गया था,वही इसका दूसरा मिशन अपने आप में एक जटिल मिशन है जिसमे एक आर्बिटर,लैंडर और रोवर को शामिल किया गया।लैंडर का नाम विक्रम और रोवर का नाम प्रज्ञान रखा गया ।लैंडर को moon की सतह पर उतरने से लेकर रोवर को उसकी सतह पर चलने तक की प्रक्रिया को अंजाम देने के लिए नेविगेशनल,लैंडिंग कैलकुलेशन और प्रोपल्शन सिस्टम आदि पर गहन रिसर्च की आवश्यकता होती है,जिसमे वक्त लगना लाजमी है





2. मिशन 2 के लिए फंड की व्यवस्था भी इसका एक कारण हो सकता है।

3.मिशन 1 से प्राप्त जानकारियों का विश्लेषण कर एक उचित लैंडिंग साइट और इस मिशन के लिए,बदलते हुए वक्त के साथ एक नया लक्ष्य तय करना भी, इसके पीछे के वजह हो सकती है।

4.इसमें लैंडर के डेवलपमेंट में रसिया का सहयोग भी मिला।

ऐसे पार्टनर से तकनीकी सहयोग की विभिन्न आयामों पर चर्चा कर एक उचित समझौते पर पहुंचना भी महज कुछ दिनों की बात नहीं है, इसमें वक्त लगता है।

चंद्रयान 2 की डिजाइन और इसके अन्य भाग का निर्माण।

Orbiter-ये स्पेसक्राफ्ट का मुख्य हिस्सा है।जो लैंडर और रोवर को carry करेगा।ये स्वयं moon का चक्कर लगाएगा।इसी के जरिए सारा डाटा इसरो हेडक्वार्टर को प्राप्त होंगे।
कुल वजन 2379 kg
जीवन काल - एक वर्ष
इसमें  दो उपकरण लगे है।
एक IIRS जिसे IMAGING INFRARED IMAGING Spectrometer कहते है। MOON के खनिज संघटना को विश्लेषित करने में मदद करेगी।
दूसरा DFSAR, जिसका मुख्य काम ऊपर से ही MOON पर ICE के कणों की मौजूदगी का पता करने में मदद करेगा।



Lander- इसका नाम विक्रम लैंडर भी है । इसका मुख्य कार्य रोवर को लेकर moon की सतह पर लैंड करना है।
इसका कुल वजन लगभग 1500kg ।
Moon की भूकंपीय हलचल पर इन्फॉर्मेशन कलेक्ट करने के लिए इसमें ILSA डिवाइस का इस्तेमाल हुआ है।



Rover- प्रज्ञान के नाम जाना जाने वाला ये उपकरण लैंडर के माध्यम से moon surface पर लैंड होगा।
इसका कुल वजन 27 kg 
इसका जीवन काल लगभग 14 दिन ( जो की moon के लिए एक दिन के बराबर होगा) था।

कार्य।  Moon के सतही मिट्टी की वैज्ञानिक ढंग से जांच करना।

XRay डिवाइस APXS ( Alfa Particle Xray Spectrometer) से सुसज्जित इस रोवर द्वारा lunar surface के एटॉमिक लेवल की टेस्टिंग की जा सकती थी।




लॉन्चिंग और चंद्रयान 2 की यात्रा विवरण

इसकी लॉन्चिंग के लिए सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा, आंध्रप्रदेश के लॉन्च पैड का इस्तेमाल किया गया। Geosynchrnous satellite launch Vahicle mark III जो, उस वक्त भारत का सबसे ताकतवर लॉन्च व्हीकल था।के द्वारा इसे लॉन्च किया गया।
लॉन्चिंग के बाद GSLV MKIII ने इसे अर्थ के दीर्घ वृत्ताकार कक्षा में स्थापित कर दिया।
यहां पर इसने अर्थ के कई चक्कर लगाए । ताकि अर्थ की गुरूत्वीय प्रभाव से बाहर निकलने के लिए आवश्यक बल को प्राप्त कर सके। 
आखिर में स्पेसक्राफ्ट के प्रपुल्सन द्वारा इसे वो आवश्यक थ्रस्ट दिया गया ताकि ये moon की तरफ का trajectory path को प्राप्त कर अर्थ orbit से बाहर निकल सके।
और मिशन 2 अपनी moon की यात्रा पर निकल सके।
Moon के पास पहुंचने पर स्पेसक्राफ्ट में लगे थ्रस्टर द्वारा इसके स्पीड को इतना कम किया गया ताकि ये moon के गुरूत्वीय प्रभाव में आ जाए।और इसे उसकी कक्षा में स्थापित किया जा सके।


चंद्रयान 2 के 100% सक्सेस में आई मुख्य समस्याएं

इसे moon के साउथ पोल पर लैंड करना था , जहां की लैंड स्ट्रक्चर एवं उच्चावच में विषमताएं बहुत थी, क्रेटर्स की संख्या ज्यादा होने के कारण एक सटीक और उचित लैंडिंग लोकेशन को लॉक करना विक्रम के लिए सबसे बड़ी चुनौती थी।
प्रज्ञान रोवर को सोलर लाइट द्वारा ऊर्जा प्रदान की जानी थी ,सूर्य की किरण साउथ पोल में बहुत कम प्राप्त होती है।
अतः रोवर को महज धरती के 14 दिनों बराबर के टाइम फ्रेम में अपने टारगेटेड information collect  करना स्वयं में बड़ी चुनौती थी।

चंद्रयान मिशन का क्या हुआ?

स्पेसक्राफ्ट से लैंडिंग का प्रोसीजर स्टार्ट होने के बाद लैंडिंग के महज कुछ मिनट पहले ही इसरो हेडक्वार्टर का लैंडर से संपर्क टूट गया।

क्या चंद्रयान 2 फेल हुआ?

Moon की सतह से मात्र 2.1 किलोमीटर ऊपर पहुंचने पर इसका कम्युनिकेशन से ऑफ हो जाना इसरो और हमारे लिए निराशा वाली बात हो सकती हैं
लेकिन इस मिशन की जटिलता और चुनौतियों को देखते हुए इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता की ये मिशन अपने आप में 90 % सफल रही। इससे हम moon landing के लिए आवश्यक नेविगेशनल डाटा को प्राप्त कर सके, जिसका प्रयोग भविष्य के मिशन को शत प्रतिशत सफल बनाने में प्रयोग किया जा सकेगा।

इस मिशन के अमूल्य और अकल्पनीय फायदे।

1-राष्ट्रीय गौरव और प्रेरणा: चंद्रयान-2 ने भारत में राष्ट्रीय गौरव और एकता की भावना पैदा की। सफल प्रक्षेपण और चंद्रमाका पता लगाने के देश के महत्वाकांक्षी मिशन ने भारतीय जनता के बीच व्यापक ध्यान और उत्साह आकर्षित किया। मिशन नेवैज्ञानिकों, इंजीनियरों और छात्रों की एक नई पीढ़ी को विज्ञान और प्रौद्योगिकी में करियर बनाने के लिए प्रेरित किया।

2-अंतर्राष्ट्रीय सहयोग: चंद्रयान-2 ने अंतरिक्ष अनुसंधान और अन्वेषण के क्षेत्र में अन्य देशों के साथ भारत के सहयोग कोमजबूत किया। इस मिशन में नासा जैसे अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के साथ साझेदारी और अन्य अंतरिक्ष के क्षेत्र में प्रगतिशील देशोंके साथ सहयोग शामिल था। इन सहयोगों ने ज्ञान, विशेषज्ञता और संसाधनों के आदान-प्रदान को सुविधाजनक बनाया है, जिससे भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के समग्र विकास में मदद मिली है।

3-क्षमताओं में विकास -चंद्रयान-2 के इस मिशन ने अंतरिक्ष अन्वेषण और अनुसंधान में भारत की बढ़ती क्षमताओं को प्रदर्शित किया। मिशन ने जटिल अंतरिक्ष मिशनों को विकसित करने और लॉन्च करने की ,देश की क्षमता को प्रदर्शित किया, जिससे भविष्य में और अधिक महत्वाकांक्षी परियोजनाओं का मार्ग प्रशस्त हुआ। इसने अंतरिक्ष में अग्रणी देश और वैश्विक अंतरिक्ष समुदाय में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में भारत की स्थिति को मजबूत किया है।

4. आर्थिक और औद्योगिक लाभ: चंद्रयान-2 मिशन का भारत की अर्थव्यवस्था और उद्योग पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा।मिशन के विकास, प्रक्षेपण और संचालन ने विनिर्माण, इंजीनियरिंग और अनुसंधान क्षेत्रों सहित, भारतीय अंतरिक्ष उद्योग केलिए अवसर पैदा किए। इसने तकनीकी नवाचार और संबंधित उद्योगों के विकास को प्रोत्साहित किया, रोजगार सृजन औरआर्थिक विकास में योगदान दिया।

 भविष्य की योजना _

chandrayan ३

चंद्रयान-3 चंद्रयान-2 का अनुवर्ती मिशन होगा जो चंद्र सतह पर सुरक्षित लैंडिंग और रोविंग की एंड-टू-एंड क्षमता प्रदर्शित करता है। इसमें लैंडर और रोवर शामिल हैं। इसे एलवीएम3 द्वारा सतीश धवन अन्तरिक्षस्टेशन श्रीहरिकोटा से प्रमोचित किया जाएगा। प्रणोदन मॉड्यूल 100 किमी चंद्र कक्षा तक लैंडर और रोवर को ले जाएगा। प्रोपुल्शन मोड्यूल में चंद्र कक्षा से पृथ्वी के वर्णक्रमीय और ध्रुवीय मीट्रिक मापों का अध्ययन करने के लिए स्पेक्ट्रो-पोलरिमेट्री ऑफ हैबिटेबल डिवाइस का प्रयोग होगा




next part chandrayan ३ ——————तब तक के लिये —नमस्कार।  




 




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