chandrayan Mission 1 Hindi - चंद्र यान प्रथम 2008 (A brief history)

चंद्रयान-1 मिशन को ISRO(भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन) द्वारा विकसित और संचालित किया गया था।यहभारत का पहला Moon मिशन था।इसका विकास और लांचिंग,वर्ष 2008 में हुआ।इस मिशन से संबंधित कुछमहत्वपूर्ण घटनाओं पर आपका ध्यान ले जाना चाहूँगा।
1. प्रारंभिक विकास: चंद्रयान-1 मिशन का विकास सन् 2003 में भारत सरकार द्वारा प्राप्त मंज़ूरी के बाद शुरू हुआ।इसरो ने यह मिशन,मंज़ूरी के लगभग पाँच साल बाद अपने अंतरिक्ष उपकरणों की वैज्ञानिक और तकनीकी क्षमताओंका परीक्षण करने के उद्देश्य से शुरू किया।इस अंतरिक्ष यान में भारत, अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, स्वीडन और बुल्गारियामें बने 11 वैज्ञानिक उपकरणों को भी लगाया गया था। इस अंतरिक्ष यान का वज़न 1380 किलोग्राम था।
2. प्रमुख उद्देश्य: चंद्रयान-1 का मुख्य उद्देश्य चंद्रमा की सतह का वैज्ञानिक अनुसंधान करना था। इसके अलावा, इसरोको इस मिशन के माध्यम से -space नेविगेशन, संचार तंत्र, चंद्रमा की तापमान का अध्ययन, मून के सतह के खनिजोंएवं कैमिकल्स का मानचित्रण, वैज्ञानिक और तकनीकी उपकरणों का परीक्षण और वहाँ तक जाने में लगने वाले समयको पता करने का भी अवसर मिला।
3. लॉन्च प्रक्रिया : चंद्रयान-1 मिशन का लॉन्च 22 अक्टूबर 2008 को सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (आंध्र प्रदेश मेंस्थित)नामक एक लॉंच पैड से किया जाना था ।पर कुछ तकनीकी कारणों के चलते मिशन को लॉन्च करने में देरीहुई,मिशन की लांचिंग ,24 अक्टूबर 2008 को सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (श्रीहरिकोटा, आंध्र प्रदेश भारत )में स्थितलॉंच पैड से PSLV-3C11 नामक रॉकेट के माध्यम से सफलतापूर्वक हुआ। चंद्रयान-1 ने सफलतापूर्वक चंद्रमा कीउपग्रही कक्ष में सतह से 1000 किलोमीटर ऊपर प्रवेश किया और लगभग 10 महीने तक चंद्रमा के चारों ओर घूमतारहा। बाद के कुछ दिनों बाद ,19 may 2019 को इसका ऑर्बिटल रेडियस 100 किलोमीटर कर दिया गया, इसऑर्बिट में मून ऑर्बिटर महज़ 2 घंटे में moon का एक चक्कर लगा लेता था ।और moon surface की 3D इमेजिंग करता था ।चंद्रयान-1 में एक स्पेसक्राफ्ट (अंतरिक्ष यान) और एक oribitor (चंद्रमा के इर्द-गिर्द चक्कर लगाने वाला यान) शामिल थे।
4. इस मिशन ने क्या हासिल किया : चंद्रयान-1 ने विभिन्न वैज्ञानिक प्रयोग और उपकरणों के मदद से चंद्रमा की सतहकी गहराई, विभिन्न प्रकार के तत्वों, पानी की संभावनायें,खनिजों और अन्य महत्वपूर्ण पैरामीटरों का अध्ययन किया।29 अगस्त 2009 को चंद्र यान वन का संपर्क इसरो से टूट गया , परंतु संपर्क टूटने के पहले 312 दिनों के period मेंorbitor ने चन्द्रमा के लगभग 34 हज़ार चक्कर लगाये और 70 हज़ार से अधिक हाई रिज़ोल्यूशन में फोटो भी ली ।
इसी मिशन ने सर्वप्रथम moon के पोलर region में ice के form में पानी की मौजूदगी की पुष्टि की।
चुकि ये 24 अक्टूबर 2008 को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) द्वारा लॉन्च किया गया भारत का पहला moon अन्वेषण मिशन था। मिशन ने स्पेस वर्ल्ड में भारत के लिए कई महत्वपूर्ण मील के पत्थर स्थापित किए और दुनियाभर के लोगों से सकारात्मक प्रतिक्रियाएं प्राप्त कीं। चंद्रयान-1 की समयबद्ध सफलताओं पर भारतीय लोगो द्वारा प्राप्तकुछ सामान्य प्रतिक्रियाएँ :
1. वैज्ञानिक उन्नति: चंद्रयान-1,चंद्रमा की सतह की संरचना, खनिज विज्ञान और पानी के अणुओं की उपस्थिति काअध्ययन करने के लिए एक effective test system और एक Moon मिनरोलॉजी मैपर (एम 3) सहित अन्य कईवैज्ञानिक उपकरणों का एक सेट लेकर गया था । मिशन की सफलता को एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक उपलब्धि के रूप मेंदेखा गया, जिसने चंद्रमा और उसकी उत्पत्ति के बारे में हमारी समझ में मदद की ।2. तकनीकी उपलब्धि: चंद्रयान-1 ने अंतरिक्ष अन्वेषण में भारत की तकनीकी क्षमता का प्रदर्शन किया। मिशन मेंअंतरिक्ष यान को चंद्र कक्षा में स्थापित करने के लिए जटिल इंजीनियरिंग और सटीक नेविगेशन शामिल था। उचितबजट के भीतर इस तरह के परिष्कृत मिशन को विकसित करने और लॉन्च करने की इसरो की क्षमता से लोग प्रभावितहुए।
3. अंतर्राष्ट्रीय सहयोग: चंद्रयान-1 ने अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को भी बढ़ावा दिया। मिशन में NASA, यूरोपीय अंतरिक्षएजेंसी (ESA) और अन्य अंतरराष्ट्रीय भागीदारों के उपकरण शामिल थे। इन संगठनों की भागीदारी ने Moonअन्वेषण में वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय के समर्थन और सहयोग को प्रदर्शित किया।
4. युवाओं को प्रेरित करना: चंद्रयान-1 ने युवा भारतीयों की पीढ़ी को विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित(space science) में करियर बनाने के लिए प्रेरित किया। मिशन की सफलता ने कई छात्रों को अंतरिक्ष अनुसंधानमें रुचि लेने और वैज्ञानिक या इंजीनियर बनने की इच्छा रखने के लिए प्रेरित किया।
5. वैश्विक मान्यता: चंद्रयान-1 को व्यापक अंतरराष्ट्रीय मान्यता और प्रशंसा मिली। मिशन की उपलब्धियों की दुनियाभर के वैज्ञानिक समुदाय ने सराहना की और इससे इसरो को अंतरिक्ष अन्वेषण में एक प्रतिष्ठित खिलाड़ी के रूप मेंस्वयं को स्थापित करने में मदद मिली।
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नमस्कार








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